मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी की अगली पीढ़ी : 5जी | What is 5G Technology?

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मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी का जो आधुनिक रूप आज हमारे समक्ष है, वह शुरू से ही ऐसा नहीं था। इसका यह स्वरुप इसके क्षेत्र के निरंतर विकास का प्रतिफल है। मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी में ‘ जी ‘ का मतलब होता है – मोबाइल संचार सेवा के जेनरेशन। यानी ‘जी’ का प्रयोग पीढ़ी के लिए है, जैसे :- 1जी पहली पीढ़ी, 2जी दूसरी पीढ़ी तथा इसी प्रकार 3जी एवं 4जी क्रमशः तीसरी और चौथी पीढ़ी की मोबाइल सेवाएं हैं।

                       पहले लैंडलाइन और फिर मोबाइल फ़ोन के ज़रिए संचार क्षेत्र में क्रांति का आगाज़ हुआ। मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी ने अपने स्वरुप का इतने तेज़ी से विकास किया है कि वर्तमान में उपलब्ध 4जी के विकल्प में 5जी प्रौद्योगिकी के आने की बात चलने लगी है।

> मोबाइल संचार की हर पीढ़ी एक विशेष रेडियो फ्रिक्वेंसी स्पेक्ट्रम पर कार्य करती है। डेटा अंतरण दर, फ्रिक्वेंसी स्पेक्ट्रम की बैंडविड्थ पर निर्भर करती है। उपभोक्ताओं की इच्छा स्वाभाविक रूप से अधिक से अधिक डेटा प्राप्त करने की होती है इस प्रकार डेटा की आवश्यक्ता बढ़ जाने पर बैंडविड्थ पर दबाव पड़ता है। नतीजतन, मोबाइल सेवा द्वारा प्रदान की जाने वाली डेटा स्पीड कम हो जाती है।

मोबाइल की अगली पीढ़ी 5जी है, इसे जानने से पहले मोबाइल की पहली चार पीढ़ियों को जानते है –

मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी की पहली पीढ़ी ‘ 1जी ‘ (1G )

>  यह एक कम बैंडविड्थ ( 30 किलोहर्ट्ज ) का संचार नेटवर्क था जिसका सं 1980 के दशक में आगमन हुआ। यह एनालॉग संचार नेटवर्क था जिसके डेटा की अंतरण दर 2 किलोबीट्स सेकेण्ड ( 2 kbps ) थी। इस सेवा के माध्यम से केवल आवाज़ यानि वॉयस का ही आदान प्रदान किया जा सकता था।

दूसरी पीढ़ी ‘ 2जी ‘ ( 2G )

>  सं 1991 में फ़िनलैंड में आई यह मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी भी कम बैंडविड्थ ( 30 – 200 किलोहर्ट्ज) की थी। लेकिन पहली पीढ़ी जो एनालॉग थी, के तुलना में इसमें डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ था। इसके द्वारा वॉयस एवं लिखित सन्देश और डेटा का आदान-प्रदान संभव था। इसके डेटा अंतरण की दर 64 किलोबीट्स ( 64 kbps ) प्रति सेकण्ड थी। इसके द्वारा एसएमएस भेजना पहली बार संभव हुआ।

तीसरी पीढ़ी ‘ 3जी ‘ ( 3G )

>  सं 2000 में आई तीसरी पीढ़ी की मोबाइल प्रौद्योगिकी की बैंडविड्थ 15 से 20 मेगाहर्ट्ज थी जो पहली और दूसरी पीढ़ियों के तुलना में काफ़ी अधिक थी। इसकी डेटा अंतरण दर 384 kbps से 2 मेगबीट्स ( 2 mbps ) थी। इस मोबाइल सेवा में वॉयस भेजने के लिए सर्किट-स्विचिंग जबकि लिखित सन्देश और डेटा भेजने के लिए पैकेट-स्विचिंग  प्रयोग किया।  यह 1.8 से 2.4 गीगाहर्ट्ज के फ्रिक्वेंसी बैंड पर कार्य करती थी। 3जी टेक्नोलॉजी वाले मोबाइल फ़ोनों के ज़रिए वीडियो कॉन्फ्रेसिंग भी की जा थी, जिसके लिए फ़ोन में दो कैमरों की ज़रूरत थी।

चौथी पीढ़ी  ‘ 4 जी ‘ ( 4G )

> सं 2010 में आई मोबाइल प्रौद्योगिकी की चौथी पीढ़ी ने तो क्रांति ही ला दी। इससे वॉयस एवं लिखित संदेशों व डेटा के आदान-प्रदान के लिए पैकेट स्विचिंग का ही प्रयोग किया जाता है। यह मोबाइल सेवा 2 से 8 गीगाहर्ट्ज के फ्रेक्वेंसी बैंड पर कार्य करती है। एल टी ए ( लांग टर्म इवोल्यूशन ) पर आधारित 4 जी मोबाइल सेवा की डेटा अंतरण दर 100Mbps से 1Gbps है। तथा इसकी बैंडविड्थ 100 मेगाहर्ट्ज है। इसमें 3 जी के तुलना में डाउनलोडींग गति दोगुनी होती है। चौथी पीढ़ी की मोबाइल सेवा की उच्च गति इसे हाई डेफिनेशन ( एच डी ) मोबाइल टी वी, वीडियो कॉन्फ्रेसिंग त्रि-विमीय ( 3 डी ) टी वी तथा अन्य अनुप्रयोगों, जहाँ उच्च गति की आवश्यकता होती है, की लिए उपयुक्त बनती है।

मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी की पांचवीं पीढ़ी यानी ( 5 जी )

> मोबाइल प्रौद्योगिकी की पांचवीं पीढ़ी आई ई ई ई 802.11 एसी स्टैंडर्ड पर युक्तियों आधारित होगी। यह मोबाइल सेवा 3 से 300 गीगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी बैंड पर कार्य करेगी। यह अधिक नेटवर्क प्रदान करने में मदद करेगी। 5 जी डेटा अंतरण की गति 4 जी एल टी ई की तुलना में क़रीब दस गुना अधिक होगी। यह मोबाइल सेवा वर्त्तमान में उपलब्ध 4 जी की तुलना में कहीं अधिक डेटा उपलब्ध करा सकेगी तथा यह ऊर्जा दक्ष भी होगी।

चूँकि आवृति तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अधिक आवृति युक्त रेडियो फ्रीक्वेंसी का अर्थ है कि तरंगदैर्ध्य मिलीमीटर परिसर में स्थित होगी। इन ( मिलीमीटर ) तरंगों की तरंगदैर्ध्य 1 से 10 मिलीमीटर के बीच होगी। ऐसी तरंगों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह आती है, कि ये ठोस पदार्थों से होकर पारगमित नहीं हो पाती हैं। इस कारण दीवार या भवनें इसके लिए अवरोध का कार्य करते हैं। बारिश या हवा में मौज़ूद नमी द्वारा भी ये तरंगें अवशोषित कर ली जाती हैं।

अतः मिलीमीटर परिसर में स्थित संकेतों के सम्प्रेषण यानी ट्रांसमिशन के लिए वृहत नेटवर्क टावरों के निकट मिनी बेस स्टेशनों को स्थापित किये जाने की आवशयकता पड़ती है। ताकि अवरोधों को इन संकेतों के मार्ग में आने से रोका जा सके। ऐसी निन्म शक्ति ( लो पावर ) के बेस स्टेशन बड़े टावरों से संकेतों को पहुंचते हैं तथा निर्दिष्ट आवृति का पुनरुपयोग का फिर संचार युक्तियों ( मोबाइल फ़ोन आदि ) तक संकेतों को पहुँचाते हैं।

पांचवीं पीढ़ी ( 5 जी )  नेटवर्क के अन्य महत्वपूर्ण पहलू को मेसिव-मीमो  ( MIMO ) की संज्ञा दी जाती है। मीमो मल्टीपल इनपुट मल्टीपल आउटपुट का संक्षिप्तिकरण है। इसके अंतर्गत बेस स्टेशन पर वृहत एंटीना ऐरे का उपयोग अनेक ऑटोनोमस टर्मिनलों तक एक साथ पहुँचाने के लिए किया जाता है। यह नेटवर्क की त्रुटि को कम करता है। और इस प्रकार इसकी दक्षता को बढ़ता है।

पांचवीं पीढ़ी ( 5 जी ) की उच्च गति वी. आर, 4 के, स्ट्रीम्स, चालकविहीन ड्राइविंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, प्रसारण जैसी सेवाओं तथा ऑनलाइन गेमिंग आदि के लिए अधिक उपयोगी होगी। इन सभी अनुप्रयोगों में लेटेंसी की अवधि एक मिलीसेकेंड से कम होगी। प्राकृतिक आपदाओं आदि के समय भी 5 जी द्वारा लाइफ-लाइन संचार स्थापित करना संभव होगा।

कुछ निर्मातओं ने 5 जी के लिए स्वीकृति मानक ( स्टैंडर्ड ) के विनिर्देशों ( स्पेसिफिकेशन्स ) को अपने उत्पादों में शामिल करना भी आरम्भ कर दिया है। क्वैलकॉम ने तो अपने पहले 5 जी मॉडेम एक्स-50 की घोषणा भी कर दी है। इस कंपनी का दावा ही कि इस मॉडेम से 5 गीगाबिट्स प्रति सेकेंड की डेटा अंतरण गति प्रदान की जा सकेगी। एटी एन्ड टी की योजना भी अगले वर्ष तक अपने 5 जी मोबाइल बाज़ार में उतारने के है। अमेरिका संभवतया पहला देश होगा जहाँ 5 जी मोबाइल प्रोद्योगिकी की सेवाएं सबसे पहले उपलब्ध होंगी। हमारे देश में 5 जी प्रौद्योगिकी को आने में अभी तीन-चार वर्ष और लग सकते हैं। दूरसंचार मत्रालय की योजना  5 जी प्रद्योगिकी को भारत में जल्द से जल्द लाने की है। वैश्विक स्तर पर 5 जी के व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध होने की अब मत्रालय को इंतज़ार है।

इस दिशा में रिलायंस जिओ भी सक्रिय है। फिलहाल सैमसंग के साथ मिलकर रिलायंस जिओ की योजना 4 जी के नेटवर्क सेवाओं को सुधारने के साथ-साथ 4.5 जी नेटवर्क को भी स्थापित करने की है। बाद में 4.5 जी में आवश्यक सुधर करके 5 जी नेटवर्क में बदलने का रिलायंस जिओ का विचार है। हुआवे इंडिया के मुख्य वित्त अधिकारी ‘ जे चेन ‘ का कहना है कि 5 जी के साथ अति उन्नत मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी उपभोक्ताओं को उपलब्ध होगी, जो मोबाइल संचार के उनके समग्र अनुभव को ही अमूल-चूल बदल देगी। फ़िलहाल रिलायंस जिओ और एयरटेल जैसी मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां पुरे देश में 4 जी – एल टी ई नेटवर्क उपलब्ध करने की दिशा में काम कर रही हैं  इसमें कोई दो राय नहीं कि 5 जी मोबाइल प्रौद्योगिकी के आ जाने ओर मोबाइल संचार के क्षेत्र में नई क्रांति का आग़ाज़ होगा। लेकिन, 4 जी, 3 जी और 2 जी मोबाइल संचार प्रद्योगिकीयों की भी थोड़ी बहुत उपयोगिता हमारे देश में बानी रहेगी। अब भी कई ग्रामीण क्षेत्र में 2 जी नेटवर्क से ही काम लिया जाता है। इन क्षेत्रों के अधिसंख्य उपयोक्ताओं के लिए हाईस्पीड इंटरनेट अभी अनजानी सी बात है। बहरहाल, 5 जी प्रौद्योगिकी के हमारे देश में आ जाने के बाद क्या होगा यह तो इसके आने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन, यह तय है कि यह प्रौद्योगिकी मोबाइल संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन अवश्य लाएगी।

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