Indian Constitution An Introduction | भारत का संविधान – एक परिचय | Academic Hub

bharat ka sanvidhan
the constitution of india
  • संविधान कुछ ऐसे बुनियादी सिंद्धान्तों का समूह है जिसके आधार पर राज्य का निर्माण और शासन होता है। मतलब, संविधान वह सत्ता है जो सर्वप्रथम सरकार बनती है। संविधान का यह काम है, कि वह सरकार द्बारा लागु किये जाने वाले कानूनों पर कुछ सीमाएं लगाए। यह सीमाएँ इस रूप में मौलिक होती हैं कि सरकार कभी उसका उल्लंघन नहीं कर सकती। दूसरी ओर संविधान यह भी सुनिश्चित करता है, कि वह सरकार को ऐसी क्षमता प्रदान करे जिससे वह जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर सके और एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के लिए उचित परिस्थितियों का निर्माण कर सके। इस दृष्टि से संविधान समाज की बुनियादी पहचान होता है। संवैधानिक नियम हमें एक विशाल ढांचा प्रदान करता है जिसके अन्तर्गत हम अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं, लक्ष्य और स्वतंत्रताओं का प्रयोग करते हैं। अतः संविधान हमें नैतिक पहचान देता है। bharat ka sanvidhan

वास्तव में एक संविधान अपने समाज की आकांक्षाओं का एक पिटारा है। भारत के संविधान निर्माताओं की यह इच्छा थी कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की बुनियादी भौतिक ज़रूरतें और शिक्षा सहित वह सब कुछ मिलना चाहिए जिसके आधार पर वह गरिमा और समाजिक आत्म सम्मान से भरा जीवन जी सके।

संविधान के उद्देश्य – प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु :-

* भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य है ;

*भारत ब्रिटेन के अधिकार में आने वाले क्षेत्रों, देशी रियासतों, और देशी रियासतों के बहार के ऐसे क्षेत्र जो हमारे संघ का अंग बनाना चाहतें हैं, का एक संघ होगा ;

*संघ की इकाइयाँ स्वायत होंगी और उन सभी शक्तियों का प्रयोग और संपादन करेंगी जो संघीय सरकार को नहीं दी गईं ;

*स्वतंत्र व संप्रभु भारत तथा इसके संविधान की समस्त शक्तियों का स्रोत जनता है ;

*भारत के सभी लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय; कानून के समस्त समता; प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा कानून और सार्वजानिक नैतिकता की सीमाओं में रहते हुए भाषण, अभिव्यक्ति,विश्वाश, धर्म, उपासना, व्यवसाय, संगठन और कार्य करने की मौलिक स्वतंत्रता की गारंटी और सुरक्षा दी जाएगी;

  • अल्पसंख्यक पिछड़ेजनजातीय क्षेत्र, दलितअन्य पचड़े वर्गों को समुचित सुरक्षा की जाएगी ;
  • गणराज्य की क्षेत्रीय अखंडता तथा थल जल और आकाश में इसके संप्रभु अधिकारों की रक्षा सभ्य राष्ट्रों के कानून और न्याय के अनुसार की जाएगी;
  • विश्व शांति और मानव कल्याण के विकास के लिए देश स्वेच्छापूर्वक पूर्ण योगदान देगा।

# विभिन्न देशों के संविधान से लिए गए प्रावधान :-

– ब्रिटिश संविधान –

*सर्वाधिक मत के आधार पर चुनाव में जीत का फ़ैसला, सरकार का संसदीय सवरूप ;

*कानून के शासन का विचार ;

  • विधायिका में अध्यक्ष का पद और उनकी भूमिका ;
  • कानून निर्माण की विधि।

– आयरलैंड का संविधान –

* राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व

– फ्रांस का संविधान –

* स्वतंत्रता समानता और बंधुता का सिद्धांत

अमेरिका का संविधान –

* मौलिक अधिकारों की सूची ;

* न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता

– कनाडा का संविधान –

* एक अर्ध-संघात्मक सरकार का स्वरुप ( सशक्त केंद्रीय सरकार वाली संघात्मक व्यवस्था );

*अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धांत

# अधिकारों का घोषणा पत्र ;-

भारत का संविधान अपने नागरिकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों की घोषणा करता है। यें अधिकार इन मायनों में मौलिक होंगी कि सरकार भी इनका उल्लंघन नहीं कर सकती, अगर इनका उल्लंघन होता है तो व्यक्ति सीधा उच्च न्यायलय या सर्वोच्च न्यायलय में इन्हें लागु करवाने के लिए जा सकता है, और न्यायलय इन्हें लागु कारने के लिए सरकार को आदेश देगी।

आगे है….. मौलिक अधिकार .. [ संविधान पार्ट – 2 ]

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