2018 में क्यों आएंगे भारत समेत सभी उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में कई विनाशकारी भूकंप ! earthquake2018

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2018 में क्यों आएंगे भारत समेत सभी उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में कई विनाशकारी भूकंप – पृथ्वी के घूर्णन गति में आ रही कमी ने साल 2018 में उष्णकटिबंधीय इलाकों में कई विनाशकारी भूकंप आने की संभावना को जन्म दिया है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के घूर्णन गति कम होने की पांच-पांच साल की कई समयावधि की पहचान की है इन समयावधियों के बाद ही बड़ी संख्या में भूकंप दर्ज किये गए। शोधकर्ताओं के अनुसार इस बार यह चार साल पहले शुरू हो चुकी है इसलिए 2018 अति संवेदनशील माना जा रहा है। earthquake2018

घूर्णन – पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने की क्रिया को घूर्णन कहते है, अपने अक्ष पर पृथ्वी पश्चिम से पूरब की तरफ मुड़ती या घूमती है जिसके कारण सूर्योदय पूरब से होता है। पृथ्वी लगभग 24 घंटे में एक घूर्णन सम्पन्न करती है।
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परिक्रमण – पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन करने के साथ-साथ, अपने कक्षा में ही सूर्य के चरों और चक्कर या परिक्रमा करती है जिसे परिक्रमण क्रिया कहते हैं। पृथ्वी लगभग एक लाख किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सूर्य का परिक्रमा करती है और सूर्य का एक परिक्रमा पूर्ण करने में पृथ्वी लगभग 365 दिन 6 घंटे लगाती है। EarthsRotation

साफ़ है, कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमते ( घूर्णन ) हुए सूर्य के चरों ओर चक्कर ( परिक्रमण ) लगाती है और यह करोड़ों सालों से ऐसे ही जारी है और ऐसे ही करोड़ों सालों से पृथ्वी पर मौज़ूद नदियां, सागर, महासागर, महाद्वीप, जीव-जन्तु, पेड़-पौधें, इत्यादि पृथ्वी के साथ इसकी गति के साथ चलायमान हैं तथा पृथ्वी के क्रियाओं व इसकी गति के अभ्यस्त हैं।
जिस प्रकार हम मोटरगाड़ी, मोटरसाइकल, या ट्रेन जैसे वाहनों पर सवार होकर जिस वेग या गति से गाड़ी चलती है, हम भी उसी वेग या गति से गाड़ी के साथ सफर करते हैं यानि जिस वेग से गाड़ी चलती है उसी वेग को हमने भी गाड़ी के ज़रिये धारण किए होते हैं और जैसे ही गाड़ी में ब्रैक लगती है या गति धीमी है तो हम उस गति के अभ्यस्त हो चुके, हमारी गति में तत्काल कमी नहीं आती है और हम हिचकोलें खाते हुए आगे-पीछे होने लगते हैं, और अपने सहयात्रियों से टकरा भी जाते है, ठीक इसी प्रकार पृथ्वी भी हमारी सवारी है और हम, महासागरों, महद्वीपों, पेड़-पौधें और सभी जीव-जन्तु जैसे सहयात्रियों के साथ इसपर सवार हैं, और पृथ्वी पर विद्यमान उपर्युक्त सभी चीजें पृथ्वी के घूर्णन गति व परिक्रमण गति के सालों से अभ्यस्त है, चूँकि घूर्णन गति कम हो रही है, तो इस गति के अभ्यस्त हो चुके महासागर-महाद्वीप व इनके टेक्टोनिक्स प्लेट, इनमे टक्कर होने की संभावना बढ़ जाएगी।
यहीं कारण है, कि अमेरिकी शोधकर्ताओं ने 2018 में, महासागरीय-महाद्वीपीय टेक्टोनिक्स प्लाटों की अधिकता वाले उष्णकटिबंधीय ( कर्क-मकर वृत्त के बीच का क्षेत्र ) क्षेत्र में बड़े व कई विनाशकारी भूकंप आने की आशंका जताई है।
ये भी देखें -ऋग्वे, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद । आर्य सभ्यता (वैदिक काल)
पृथ्वी की घूर्णन गति में क्यों कमी आई – पृथ्वी पर पड़ने वाले चाँद के ज्वारीय प्रभाव ( चन्द्र्गुरुत्वकर्षण ) के कारण समय-समय पर घूर्णन गति धीमी होती रहती है। यह कमी कुछ मिलीसेकंड के प्रतिदिन के हिसाब से होती है जिसकी गणना परमाणु घड़ियों से की जाती है।
ये भी देखें – ब्राह्मण,आरण्यक,उपनिषद,वेदांग आर्य-सभ्यता (वैदिक-काल) part-3

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