FUNDAMENTAL RIGHTS IN HINDI | Right to equality | [ मौलिक अधिकार ]

bharat ka sanvidhan
the constitution of india

अधिकारों का घोषणापत्र :-

Fundamental rights hindi :-  अधिकारों और उन्हें लागु किया जाना महत्वपूर्ण है। इसलिए, अधिकतर लोकतांत्रिक देश नागरिकों के अधिकारों को संबिधान में सूचीबद्ध कर दिया जाता है। प्रजातंत्र में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि व्यक्क्तियों को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त हैं जिन्हें सरकार सदैव मान्यता देगी . संविधान द्वारा प्रदान किये गए और संरक्षित अधिकारों की ऐसी सूची को ‘ अधिकारों का घोषणापत्र या मौलिक अधिकार कहते हैं ‘। 

                                 भाग – 3

                       मौलिक अधिकार

सत्ता का अधिकार :-

  • कानून के समक्ष समानता
  • कानून का सामान संरक्षण
  • धर्म, जाति, लिंग, या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेद
  • रोजगार में अवसर कि समानता
  • पदवियों का अंत
  • छुआछुत की समाप्ति

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार :-

  • आस्था और प्रार्थना की आज़ादी
  • धार्मिक मामलों के पप्रबंधन और खास तरह कि संस्ताओं में धार्मिक निर्देश देने की स्वतंत्रता
  • किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृति के लिए कर अदायगी कि स्वतंत्रता
  • कुछ शिक्षा संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या उपासना में उपस्थित होने की स्वतंत्रता

शोषण के विरुद्ध अधिकार :-

  • बंधुआ मज़दूर पर रोक
  • जोखिम वाले कामों में बच्चों से मज़दूरी करने पर रोक

स्वतंत्रता का आधिकार :-

  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  • भाषा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • शांतिपूर्ण ढंग से जमा होने और सभा करने की स्वतंत्रता
  • संगठित होने की स्वतंत्रता
  • भारत में कहीं भी आने जाने की स्वतंत्रता
  • भारत के किसी भी हिस्से में बसने और रहने कि स्वतंत्रता
  • कोई भी पेशा चुनने और व्यापर करने की स्वतंत्रता
  • जीवन की रक्षा और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार
  • अभियुक्तों और सज़ा पाएं लोगों के अधिकार
  • अपराध के लिए दोष सिद्धि के सम्बन्ध में संरक्षण
  • शिक्षा का अधिकार

सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार :-

  • अल्पसंख्यकों के भाषा और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार
  • अल्पसंख्यकों को शैक्षिक सँस्थाएँ स्थापित करने का अधिकार

संवैधानिक उपचारों का अधिकार :-

  • मौलिक अधिकार को लागु करवाने के लिए न्यायालय में जाने का अधिकार

आरक्षण की वव्यवस्था :-  अनुच्छेद 16(4) – ” इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को पछड़े हुए नागरिकों के                                                                   किसी वर्ग के पक्ष में जिनका प्रतिनिधित्व राज्य की राय में राज्य                                                                 के अधीन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है, नियुक्तियों या पदों के                                                                     आरक्षण का प्रावधान करने से नहीं रोकेगी ”

अनुच्छेद 21 – जीवन और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण ” किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा                                                                 स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा अन्यथा नहीं ”

भारत का संविधान 

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here