अर्जेन्टीना में गर्भपात को मिली क़ानूनी मान्यता | भारत एवं दुनिया में गर्भपात से सम्बंधित क्या हैं नियम ? | Academic Hub

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अर्जेंटीना में गर्भपात अब कानूनन वैध होगा। पिछले कई सालों से यहाँ की महिलाएं, गर्भपात को कानूनी मान्यता प्रदान कराने के लिए, संघर्ष कर रहीं थी। अर्जेंटीना दक्षिण अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा देश है और ईसाई मत प्रधान है। ईसाईयों के धर्म-गुरु पोप फ्रांसिस का ताल्लुक़ भी अर्जेंटीना से ही है। यहाँ कैथॉलिक चर्च का विशेष प्रभाव है जिसके कारण यहाँ गर्भपात से सम्बंधित नियम काफ़ी सख्त थें। पहले अर्जेंटीना में गर्भपात दो ही परिस्तिथियों में कर सकते थे – (1) महिला बलात्कार ( rape ) की शिकार हुई हो, (2) गर्भवती महिला के स्वास्थ को ख़तरा हो। इनके अलावा गर्भपात कानूनन अवैध था। बावज़ूद इसके यहाँ प्रत्येक वर्ष हज़ारों-हज़ार की संख्या में अवैध गर्भपात कराएं जाते थे। कानून के डर से लोग गर्भपात के लिए विविध तरीक़े अपनाते थे इनमे से कई नुकसानदेह होते थे जिसके कारण महिलाओं को गंभीर स्वास्थ समस्याएं हो जाती थीं।

दो साल पहले ( 2018 में ) गर्भपात से सम्बंधित विधेयक संसद में ख़ारिज हो चूका था। इसके बाद अर्जेंटीना की महिलओं ने ज़ोर-शोर से इसके विरोध में मुहीम चलाई और सड़को पर प्रदर्शन किये। परिणामस्वरूप यह विधेयक पुनः लाया गया और अबकी बार सीनेट में लम्बी बहस के बाद 38\29 वोटों से पारित हो गया, जहाँ 38 सीनेटरों ने इसके पक्ष में अपना वोट दिया।

नए कानून के मुताबिक अब अर्जेंटीना में महिलाऐं 14 सप्ताह से कम के गर्भ का गर्भपात करा सकेंगी।

आज 30 दिसंबर को जब वोटों की गणना हो रही थी तो संसद के बहार महिलाऐं कौतुहल से एक-टक फैसले का इंतज़ार कर रहीं थी, पक्ष में फैसला आने के बाद सबों में ख़ुशी की लहर दौर गई और लम्बे समय से संघर्ष कर रहीं महिलाओं ने खूब जश्न भी मनाया।

भारत में क्या है गर्भपात से सम्बंधित नियम ?

भारत में  मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के तहत गर्भपात करवाना संभव है, यदि आपकी गर्भावस्था 20 सप्ताह से कम है। हालांकि, यह कई स्थितियों के अधीन है और गर्भपात करवाने की आपकी क्षमता डॉक्टर की राय पर निर्भर करेगी। गर्भपात कराने के लिए कुछ शर्तें निर्धारित हैं जिसे सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टर की सलाह आवश्यक  होती है जो देखते हैं कि क्या निम्नलिखित शर्तें पूरी हो रही हैं – (1) यदि गर्भावस्था माँ के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाएगी, (2) यदि इस बात की संभावना है कि बच्चा शारीरिक या मानसिक असामान्यताओं से पीड़ित होगा जो उसे गंभीर विकलांगता से ग्रसित कर सकता है, (3) गर्भपात कन्या भ्रूण हत्या से सम्बंधित न हो। तभी उन्हें कानूनी तौर पर गर्भपात करने की अनुमति दी जाती है। शर्तों को पूरा किए बिना गर्भपात कराना अपराध माना जाता है।

यदि गर्भावस्था 12 सप्ताह  से अधिक नहीं हुई है, तो केवल एक डॉक्टर को संतुष्ट होने की आवश्यकता है कि शर्तों को पूरा किया गया है, यदि गर्भावस्था 12 सप्ताह से अधिक हो गई है और 20 सप्ताह से कम है, तो दो डॉक्टरों को संतुष्ट होने की आवश्यकता है। और यदि डॉक्टर को लगता है कि गर्भपात की अवधि मायने नहीं रखती है, आपके जीवन को बचाने के लिए तत्काल गर्भपात किया जाना चाहिए तो ऐसे में किया जा सकता है। 

दुनिया में क्या है हाल ?

सेंटर फॉर रिप्रोडक्टिव राइट्स के अनुसार  के अनुसार दुनिया में 41% देश ऐसे हैं जहाँ गर्भपात निषेध है, परन्तु किन्हीं स्वास्थ कारणों में इसे करने की इज़ाजत दी जाती है।

23% माधयममार्गी कानून अपनाते है यानी कि कुछ नियमों एवं शर्तों के पालन के साथ गर्भपात कराने की अनुमति देते हैं।

36% देश ऐसे हैं जो इस मामले में बेहद उदार रुख अपनाते हैं, इन देशों में गर्भपात से सम्बंधित नियम अत्यंत उदार हैं।

दुनिया में केवल छः देश ऐसे हैं जहाँ गर्भपात पर पूर्ण-प्रतिबन्ध है। 

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