पनामा पेपर्स क्या है ? ( What Is Panama papers ? )

panama-papers पनामा पेपर्स – यह 1 करोड़ 15 लाख गुप्त फाइलों का भंडार है, जो पनामा स्थित एक कंपनी ‘ मोसेक फोंसेका ‘द्वारा इकट्ठा किया गया था। इसमें करीब 2,14,000 से ज्यादा सीक्रेट इंटरनेशनल बिज़नेस कंपनियों सम्बंधित जानकारियां हैं। इसमें उन कंपनियों के निर्देशकों शेयर होल्डरों तथा कंपनियों से संबंध रखने वाले अदि लोगों की जानकारियां भी है। यह अब तक कई देशों के नेताओं के बारे में बता चुका है, जिसमे अर्जेंटीना, आइसलैंड, सऊदी अरब, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान शामिल है। इसके अलावा यह 39 देशों के सरकार से जुड़े लोगों व सेलेब्रिटियों के बारे में भी बता चूका है, इसमें भारत, चीन, फ्रांस, ब्राज़ील, ब्रिटेन, मलेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मैक्सिको, सीरिया, व स्पेन जैसे देश भी शामिल हैं।

पिछले साल ब्रिटेन में पनामा की लॉ फर्म के लीक हुए इन दस्तावेजों में बताया गया था कि व्लादिमीर पुतिन, नवाज शरीफ, शी जिनपिंग और फुटबॉल खिलाड़ी मैसी ने कैसे अपनी बड़ी दौलत टैक्स हैवन वाले देशों में जमा की। लीक हुए टैक्स दस्तावेजों में इस बात का पता चला था कि कैसे दुनियाभर के 140 नेताओं और सैकड़ों सेलिब्रिटीज ने टैक्स हैवन देशों में पैसा निवेश किया था। इन लोगों ने फर्जी कंपनियां, ट्रस्ट और कॉर्पोरेशंस बनाए और इनके जरिए टैक्स बचाया था। लीक हुई लिस्ट खास तौर पर पनामा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और बहामास में हुए निवेशों के बारे में बताती है। सवालों के घेरे में आए लोगों ने इन देशों में इसलिए इन्वेस्ट किया, क्योंकि यहाँ कर नियम काफी आसान है और ग्राहक की पहचान का खुलासा नहीं किया जाता।

मोसेक फोंसेका ( Mossack fonseca ) – जो पेपर्स लीक हुए थे वो पनामा की लीगल कंपनी मोसेक फोंसेका की थी। इस कंपनी की स्थापना वर्ष 1977 में जुरगेन मोस्साक और रोमन फोन्सेका ने की थी। इसके 500 से अधिक कर्मचारी पूरे विश्व में 40 कार्यालयों में फैले हुए हैं। यह लगभग 3.5 लाख कंपनियों के लिए कार्य करती है और इन कंपनियों में सबसे अधिक कंपनियां ब्रिटेन में है या इसके आयकर के अंतर्गत आते हैं।

मोसेक फोंसेका कंपनी दुनियाभर की कंपनियों या लोगों से मोटी फीस लेकर उन्हें फाइनेंशियल मैटर्स पर एडवाइस देती है। एडवाइस की आड़ में यह कंपनी ऑफशोर कम्पनियाँ बना देती हैं। यानि आप फ़ीस दीजिये और आसान टैक्स सिस्टम वाले देशों में कम्पनियाँ बना लीजिए। यह लीगल कंपनी लोगों की ऑफशोर कंपनियां बनाती हैं जो सम्बंधित देशों के टैक्स नियमों से तो चलती हैं लेकिन रियल ओनरशिप को छुपा देती है।

पेपर्स लीक और सारे खुलासे कैसे हुए – जर्मन अख़बार Sueddeutsche Zeitung ने अपने एक सोर्स के जरिए ये पेपर्स हासिल किए। साइज में यह डेटा 2.6 टेराबाइट है। जर्मन डेली को मिले इन दस्तावेजों पर 100 से ज्यादा देशों की पत्रकारों की संस्था ‘ इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ‘ ( आईसीआईजे ) ने रिसर्च की और पनामा पेपर्स के नाम से दुनिया की बड़ी हस्तियों का कालाधन उजागर किया। ये पेपर्स 1975 से 2015 तक के थे।

क्या कहा ‘ मोसेक फोंसेका ‘ ने – पेपर्स लीक होने के बाद मोसेक फोंसेका ने कहा की ये क्राइम है और इसे हम अपने देश पनामा पर हमला मानते हैं। कंपनी के मुताबिक, कुछ देशों को हमारी कामयाबी पसंद नहीं आ रही है। वहीं पनामा सरकार ने कहा कि वो संदिग्ध डील्स को लेकर जीरो टॉलरेन्स की पॉलिसी पर चलती है और अगर कोई देश कानूनी तौर पर जाँच करेगा तो वह उसकी मदद करेगी।

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