जापान में वैध हुई डिजिटल करेंसी ‘ बिटकॉइन ‘

2009 में शुरू हुई विश्व की पहली डिजिटल करेंसी बिटकॉइन जापान में वैध कर दी गई। इसके जरिये अब यहाँ सेवाओं और वस्तुओं की खरीद – बिक्री की जा सकेगी। इसके लिए जापान में एक कानून भी बनाया गया है। अपनी शुरुआत के बाद ही यह करेंसी अमेरिका और चीन जैसे समृद्ध देशो में काफी लोकप्रिय हुई। हालाँकि इसे किसने बनाया यह आज तक रहस्य है। इसके बावजूद आज यह पूरी दुनिया में गुप्त तरीकों से इस्तेमाल हो रही है।
बिटकॉइन क्या है –

यह एक वर्चुअल मुद्रा या डिजिटल करेंसी है जिसपर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं होता है। यह दुनिया की सबसे महँगी करेंसी है इस समय एक बिटकॉइन की कीमत $1090 है मतलब लगभग 68000 रूपए। बिटकॉइन की कीमत में निरंतर उतार चढ़ाव होता रहता है कभी इसकी कीमत बहुत बढ़ जाती है तो कभी इसमें कमी भी आ जाती है। इसे दुनिया में कही भी ख़रीदा या बेचा जा सकता है इन्हें रखने के लिए एक बिटकॉइन वॉलेट बनाना पड़ता है जो आसानी से बन जाता है। इन्हें आधिकारिक मुद्रा से भी बदला जा सकता है।

चूँकि यह कोड या अक्षरों में होती है, इसलिए इसे न तो जब्त किया जा सकता है और न ही नष्ट। इस मुद्रा को किसी बैंक ने जारी नहीं किया है इसलिए यह किसी देश की आधिकारिक मुद्रा नहीं होती है। अतः इसपर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगता है। इसलिए यह दुनियाभर में लोकप्रिय है।
बिटकॉइन की शुरुआत कब हुई और किसने की –

2008 में पहली बार बिटकॉइन के बारे में लेख प्रकाशित किया गया। लोगो के इस्तेमाल के लिए यह 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में उपलब्ध हुई। इसे अज्ञात कंप्यूटर प्रोग्रामर या इनके समूह ने ‘सातोशी नाकामोटो’ के नाम से बनाया। यह नाम किसका है, कहाँ का है या कौन है, यह एक रहस्य है। माना जाता है कि इसे चीन या जापान में बनाया गया।

क्रेडिट या डेबिट कार्ड से लेनदेन करने पर पाँच प्रतिशत तक टैक्स लगता है। लेकिन बिटकॉइन पर टैक्स नहीं लगता। पेपाल, माइक्रोसॉफ्ट, डेल, एक्सपीडिया, डिश नेटवर्क, समेत दुनियाभर की कई कंपनियां बिटकॉइन के जरिये लेनदेन करती हैं। कई जगहों पर बिटकॉइन की एटीएम भी लगाया गया है।

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